भारतीय क्षात्त्र परम्परा - Part 80
राणा प्रतापसिंह की सफलता और उपलब्धियॉ उसकी नीतियों की योग्यता और प्रभाव को सिद्ध करती है। अपने बाहर वर्षों के सतत प्रयासों के पश्चात भी अकबर उससे कुछ भी छीन सकन...
Hindi translation of Bharatiya Kshatra Parampare
राणा प्रतापसिंह की सफलता और उपलब्धियॉ उसकी नीतियों की योग्यता और प्रभाव को सिद्ध करती है। अपने बाहर वर्षों के सतत प्रयासों के पश्चात भी अकबर उससे कुछ भी छीन सकन...
अजेय सम्राट : छत्रसाल अतुलनीय शौर्य का एक और उदाहरण बुंदेलखंड का सम्राट छत्रसाल है। इसके कारण औरंगजेब तक भयभीत था। बुंदेलखंड का नाम उस क्षेत्र की देवी विंध्यवा...
प्रतिष्ठा से वंचित सम्राट – हेमचन्द्र विक्रमादित्य भारत के लम्बे इतिहास में कुछ युद्ध बडे निर्णायक सिद्ध हुई। पानीपत की तीनो लड़ाइयां इस दृष्टि से महत्वपूर्ण र...
गुरु तेग बहादुर का शौर्य औरंगजेब ने कश्मीर पर आक्रमण कर वहां के सभी पंडितों की हत्या करने का प्रयास किया, मृत्यु के भय से उन्होंने कश्मीर नरेश को अपना राज्य सम...
उन्हे इस्लाम धर्म स्वीकरा करने के लिए बाध्य किया जाने लगा। उस समय वहाँ उपस्थित काजी ने कहा कि गोविंद सिंह चूंकि हमारा शत्रु है इसके लिए इन बच्चों को सजा न दी जा...
अप्रतिम योद्धा महाराजा रणजीत सिंह सिखों के योद्धाओं की परम्परा में महाराजा रणजीत सिंह का नाम भी श्रेष्ठतम योद्धाओं में लिया जाता है। महाराजा रणजीत सिंह ने ही उ...
छत्रपति शिवाजी :- हिंदू धर्म के पथ प्रदर्शक दक्षिण भारत में क्षात्र चेतना की परम्परा के एक और महानतम उदाहरण हिंदू धर्म के ध्वजवाहक शिवा-महाराज अर्थात छत्रपति श...
शिवाजी की विजय शिवाजी की पहली बडी विजय अफजल खान के विरुद्ध हुई थी। बीजापुर के सुल्तान ने अफजल खान को शिवाजी का वध करने भेजा था, वह प्रतापगढ़ के किले के समीप अप...
शिवाजी का अंतिम समय दुर्भाग्य से शिवाजी के उत्तराधिकारी उतने सक्षम शासक नहीं थे[1]। उनका पुत्र संभाजी अयोग्य था। अपने पिता की मृत्यु के समय संभाजी की आयु बाईस...
मराठों का वर्चस्व शिवाजी के मरणोपरांत उनके पुत्र और पौत्रों ने मुगलों का कुछ सीमा तक विरोध किया था। वस्तुतः जो वास्तविक कार्य था वह शिवाजी की प्रेरणा से युक्त...
क्षात्र की भारतीय परम्परा में राजधर्म के दृष्टिकोण को समझने हेतु यंहा हमारे ग्रंथो से धर्म तथा अर्थ संबंधी कुछ उदाहरण प्रस्तुत हैं – अत्रिस्मृति तथा विष्णु धर्म...
पंद्रहवीं शताब्दी में शेख निजामुद्दीन औलिया लिखते है कि इस्लाम के धर्मोपदेश से हिंदुओं के विचारों को नहीं बदला जा सकता है। निम्नतम स्तर के लोगों को भी अपनी जाति...