भारतीय क्षात्त्र परम्परा - Part 37
यह जानते ही विरूढक आपे से बाहर हो गया। ‘इन लोगो ने मेरे पिता को भी धोखा दिया और अब मेरा भी अपमान कर रहे है’ यह कहते हुए उसने संपूर्ण शाक्य समुदाय का ही नाश कर द...
Hindi translation of Bharatiya Kshatra Parampare
यह जानते ही विरूढक आपे से बाहर हो गया। ‘इन लोगो ने मेरे पिता को भी धोखा दिया और अब मेरा भी अपमान कर रहे है’ यह कहते हुए उसने संपूर्ण शाक्य समुदाय का ही नाश कर द...
अपने छोटे भाई की सफलता के कारण रामगुप्त में ईर्ष्याभाव बढ़ने लगता है और वह अपने भाई को विभिन्न तरीकों से क्रूरता पूर्ण व्यवहार करता है। उसने अपने भाई की हत्या क...
चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य ने जो भी निर्णय लिए तथा जो भी संबंध स्थापित किये थे वे सब शास्त्रानुसार तथा परम्परानुगत प्रथा द्वारा मान्य थे। उसके शासन काल में सनातन...
श्री कृष्ण श्री कृष्ण को ब्राह्म-क्षात्र समन्वय का सर्वोत्त्कृष्ठ अनुकरणीय प्रतीक माना जा सकता है। उनके पूर्व प्रत्येक आदर्श का प्रतिनिधित्त्व भिन्न भिन्न व्यक...
गुप्तकाल मे सनातनधर्म का पुनर्जागरण प्राचीन भारतियों ने दूर दूर तक समुद्री यात्राए की थी | उनके अनेक देशों से व्यापारिक संबन्ध थे | केवल व्यापारियों तथा व्यवसा...
यही विशेषता हम वाल्मीकि तथा व्यास में भि देखते है – राम ने जिस तरह वाली को मारा था अथवा सीता का त्याग किया था, उसके बाद भी वे सम्मान के प्रतीक बने,रणभूमी में घट...
यदि नवीन तथा नवीनतम शस्त्रों को विकसित किया जाता रहा जिससे सततरुप से शस्त्र भण्डार बढ़ता रहे तो लम्बे समय तक शांति-स्थापना की संभावना कहॉ रह जाती है ? सभी लोगों...
गुप्तकाल का वास्तुशिल्प तथा मूर्तिकला वास्तु शिल्प तथा मूर्तिकला के क्षेत्र में गुप्तकाल में असाधारण कार्य हुआ था। आज भी गुप्तकालीन उपहार के रुप में अनेक गुफा...
स्कंदगुप्त का सामर्थ्य कुमारगुप्त के पश्चात उसके पुत्र स्कंदगुप्त ने हूणों से युद्ध कर उन्हे हराया। के.एम.मुंशी के अनुसार चौथी शताब्दी के मध्यकाल में मानव इतिह...
कलिंग देश का सम्राट खारवेल यद्यपि जैन धर्म का अनुयायी था जो अहिंसा की परम्परा व विचारों के लिए विश्वविख्यात है, किंतु वह क्षात्र के सिद्धान्त को मानने वाला महान...
साम्राज्यों का युग गुप्तकाल के अंतिम समय मे गंगा किनारे स्थानेश्वार (थानेश्वर) का उदय हुआ | यह कुरुक्षेत्र में अम्बाला तथा दिल्ली के मध्य स्थित है | यहाँ हर्षव...
विदेशी यात्रियों के पूर्वाग्रह चीनी यात्री ह्वेन त्सांग, जिसे हर्षवर्धन का बड़ा सहयोग प्राप्त हुआ था, ने अपनी यात्रा गाथा में सम्राट की अत्यधिक प्रशंसा की है।...