भारतीय क्षात्त्र परम्परा - Part 1
अंग्रेजी अनुवाद की भूमिका अपनी विशिष्ट भौगोलिक स्थिति के कारण भारत सदैव से व्यापक स्तर पर बाहुल्यता की भूमि रहा है। विश्व भर के अनेक लोग भारत को श्रद्दा तथा आद...
Hindi translation of Bharatiya Kshatra Parampare
अंग्रेजी अनुवाद की भूमिका अपनी विशिष्ट भौगोलिक स्थिति के कारण भारत सदैव से व्यापक स्तर पर बाहुल्यता की भूमि रहा है। विश्व भर के अनेक लोग भारत को श्रद्दा तथा आद...
पुराणों के लक्षणों को दर्शाने वाला प्रसिद्ध श्लोक जो पुराणों की पांच मुख्य विषयवस्तु का वर्णन करता हैः- सर्ग - मुख्य रचन प्रतिसर्ग - रचना का व...
मूलस्थान में विभिन्न हिंदू संप्रदायों के शासक वर्ग और धार्मिक प्रमुख निर्णायक कार्रवाई करने में विफल रहे: पहली प्राथमिकता दुश्मन का वध और निष्कासन थी। इसमें, एक...
बख्तियार खिलजी, जिसने नालंदा, विक्रमशिला, और ओदंतपुरी जैसे विश्वविद्यालयों को नष्ट कर दिया और अनगिनत बौद्ध विहारों को नष्ट कर दिया, उसने सेन शासकों में आतंक भर...
हिंदू परंपरा के क्षात्र के अन्य आयाम इस साधारण सी किताब के दायरे में क्षात्र की हिंदू परंपरा का प्रतिनिधित्व करने वाले सभी राजवंशों और महान योद्धाओं की सूची दे...
कश्मीर कश्मीर अपने आप में भारतवर्ष की सांस्कृतिक गाथा में एक गौरवशाली अध्याय है। इस्लाम ने कश्मीर की अभिन्न सांस्कृतिक विरासत को कितनी क्रूरता से नष्ट कर दिया,...
बृहद्भारत में क्षात्र की विरासत[1] भारतवर्ष के बाहर क्षात्र की हिंदू परंपरा की विरासत को उसके विभिन्न रूपों में देखा जा सकता है। यह विरासत ईसाई धर्म, इस्लाम और...
रुद्रवर्मा, भववर्मा, महेंद्र, ईशान और जयवर्मा सहित राजाओं की एक लंबी सूची ने इस देश पर शासन किया। उनके शासनकाल के दौरान लिखे गए सैकड़ों संस्कृत शिलालेख आज भी मौ...
इसी शौर्य भाव को हम ऋषि विश्वामित्र में भी देखते हैं जिन्होने राम को क्षात्र दीक्षा प्रदान की थी। एक महर्षि बनने से पूर्व विश्वामित्र ने ब्राह्म के साथ संघर्ष क...
कालिदास की क्षात्र चेतना कवि शिरोमणि महाकवि कालिदास ने अपनी सर्वश्रेष्ठ कृति ‘रघुवंश’ में यह पूर्णतः स्पष्ट किया है कि किस प्रकार एक साम्राज्य में क्षात्र को प...
इन सबमें अद्धितीय भार्गववंशी परशुराम थे। वे ब्राह्म-क्षात्र समन्वय के श्रेष्ठ प्रतीक है। परशुराम द्वारा दुष्ट क्षत्रियों की सुव्यवस्थित विनाश लीला का वर्णन पुरा...
साम्राज्य-काल वेदों, इतिहास तथा पुराणों से अब हम तथा कथित ऐतिहासिक काल पर आते हैं। वैसे भी प्राचीन साहित्य तथा लिपिबद्ध इतिहास के मध्य कोई स्पष्ट विभाजन रेखा न...